गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णु र्गुरूदेवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है।
ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं....... इसी के साथ
मै अपने गुरुदेव श्री श्री 1008 प्रेमदास जी महाराज मौनीबाबा जी
श्री दूधाधारी जी
महराज आश्रम रामकुटी मोरहू, फाफामऊ, इलाहाबाद
और रानीखेत,उत्तराखंड को साष्टांग दंडवत प्रणाम करता हूँ।
बाइस जुलाई
2013 को गुरू पूर्णिमा है , गुरू पूर्णिमा के साथ ही आषाढ़ मास पूर्ण हो जायेगा,
भगवान शंकर का शिव शयनोत्सव भी इसी दिन मनाया
जायेगा और 23 जुलाई 2013 से सावन का महीना लग जायेगा .मेरी इच्छा हुयी कि इस बार
महान गुरू पूर्णिमा पर अपने विचार और अनुभव
आपके बीच साझा करूं
! सनातन धर्म की परंपरानुसार गुरु शिष्य के अटूट एवं पवित्र संबंधों
का पर्व गुरू पूर्णिमा
।
गुरू पूर्णिमा के दिन गुरू के प्रति
श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है ।
गुरू के कर्ज से हम कभी मुक्त नहीं हो सकते। गुरू ही मनुष्य को व्यक्तित्व
एवं चरित्र निर्माण की सही राह दिखाते है। गुरु हमारे अंतर मन को आहत किये बिना हमें
सभ्य जीवन जीने योग्य बनाते हैं।
जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती
है, ऐसे ही गुरुचरण में उपस्थित साधकों को ज्ञान,
शांति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।
अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को 'गुरु' कहा जाता है।
गुरु को गोविंद से भी ऊंचा कहा गया है। पुरातन काल से चली आ रही गुरु महिमा को शब्दों
में लिखा ही नही जा सकता।
सदगुरु नाम उसी का है ! जो अनंत को हमें थमा दे, गुरू की महिमा का व्याखान हमें ग्रंथों
और पुराणों तक से मिलता है गुरूपूर्णिमा
अर्थात गुरू के ज्ञान एवं उनके स्नेह का स्वरुप है. हिंदु परंपरा में गुरू को ईश्वर से भी आगे का
स्थान प्राप्त है गुरूपूर्णिमा अर्थात गुरू के ज्ञान एवं
उनके स्नेह का स्वरुप है. हिंदु परंपरा में गुरू को ईश्वर से भी आगे का स्थान प्राप्त है ।
गुरू गरिमा का नाम है। पूर्णिमा का चाँद गुरू परमात्मा की दिव्य चेतना का वह अंश है जो
मार्गदर्शक है और सहयोगकर्ता भी। गुरू ने आपको
जीवन की अच्छाईयों और बुराईयों से परिचय करवाया है। इन्होनें ही आपको इस योग्य
बनाया है कि आप हर सुख साधन प्राप्त कर सकें। इसका
आभार व्यक्त करने के लिए एक दिन गुरू के नाम कर दें। गुरु पूर्णिमा के पर्व पर आप भी
अपने गुरु को यथा रूप से दर्शन और पूजन करे ।
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